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आधी अधूरी कविता

शीर्षक -आधी अधूरी कविता‌।    कविता आधी अधूरी सही पर गुनगुनाती तो है।                          यादें पुरानी ही सही पर।           ‌‌       आती तो है।                                  नदी अस्वच्छ ही सही पर।       जल लाती तो है।                     यह सड़क टूटी फूटी ही सही पर मंजिल पर ली जाती तो है।                  कविता आधी अधूरी सही पर गुनगुनाती तो है।                      इस आवाज में सुर नहीं पर      गाती तो है।                                  मेरी आदत बुरी ही सही पर      मेरे मन को भाती तो है।...

यह जमाना

एक मैं था कि रिश्ते निभाता रहा दिल में ली अजीब सी घुटन अब लगता है की बाधित होने लगा है सांसो का आवागमनआंसुओं अंत तक साथ देना मेरा अब हंसने की कोई उम्मीद नहीं ऐ मेरे दोस्त ले चल मुझे एकांत में मेरी इसजमाने को जरूरत नहीं!

जीवन

चित्र